Home Navratri 5th Day of Navratri (मां स्कंदमाता)

5th Day of Navratri (मां स्कंदमाता)

नमस्कार मां के भक्तों. नवरात्रि के पांचवे दिन (5th Day of Navratri) हम देवी मां के स्कंदमाता रूप की पूजा करते हैं. नवरात्रि की बीती पिछली चार रातो मैं देवी माँ सत्य शिव को प्राप्त करने के बाद, देवी चंद्रघंटा शत्रु का नाश करती है और संसार की उत्पत्ति का प्रारंभ करती है.

नवरात्रि का अगला पड़ाव, पांचवी रात पर देवी स्कंद की माता के रूप में पूजनीय है. 

नवरात्रि के प्रत्येक रातरी की बात करें तो पहली रात्रि साधक अशुद्धियों और विकारों को त्याग कर साधना के लिए तैयार होता हे. दूसरी रातरी सत्य के मार्ग पर अग्रसर होना के लिए है. तीसरी रात्रि इस मार्ग पर चलते हुए कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने का है. और चौथी रातरी सांसारिक सुख और भोग की प्राप्ति करना है. 

पांचवी रात्रि सांसारिक जीवन में सिद्धि प्राप्त करना है अर्थात संसार में परिपक्व बनना है.

5th Day of Navratri, Maa Skandamata Mantra, Puja

Goddess Skandamata

स्कंदमाता सिंह पर सवारी है.  देव कार्तिकेय को अपनी गोद में बिठाई हैं.  मां चतुर्भुजी हैं. 

दाहिने हाथ अभय मुद्रा में है.  सर पर चंद्र सुशोभित है. देवी कमल पुष्प पर विराजी हैं.  लाल रंग माता से संबंधित है.

स्कंदमाता को हम देवी पद्मासना के नाम से भी जानते हैं.

Lord Kartikeya

सकंद अथवा कार्तिके कुंडलिनी के निचले 6 चक्रों के प्रतिनिधि है. यह चक्र(chakra) सांसारिक सृष्टि पर काम करते हैं.

देव कार्तिके भूमि, जल, अग्नि, वायु आकाश और मानस के प्रतिनिधि हैं. स्कंदमाता की आराधना से कार्तिकेय की भी कृपा हमें सांसारिक जीवन में मिलती है

माँ का ध्यान मंत्र है ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः || 

Maa Skandamata Mantra

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया ।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥

मंत्र का अर्थ

देवी स्कंदमाता के दो हाथों में कमल पुष्प है. वह सिंह सवारनी है. देवी मां हम पर कृपा करें और लाभ प्रदान करें. 

सिंह पर सवार रहने वाली और अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करने वाली स्कंदमाता हमारे लिये शुभदायी हों

Puja Significance

देवी माँ के स्कंदमाता रूप की पूजा करने से सुख, ऐश्वर्य और मोक्ष प्राप्त होता है। इसके अलावा हर तरह की इच्छाएं भी पूरी होती है। देवी स्कंदमाता को सफेद रंग बेहद ही प्यारा है जो शांति और सुख का प्रतीक है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी स्कंदमाता बुध ग्रह की संचालक हैं। देवी की पूजा से बुध ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं। यह देवी ममता और अग्नि की प्रतीक मानी जाती हैं। इसलिए वह अपने भक्तों पर सदा प्रेम और आशीर्वाद की कृपा बनाये रखती है।  

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