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दीपावली (Diwali) का महत्व

नमस्ते दोस्तों आज हम जानेंगे दिवाली के महत्व और दिवाली से जुड़ी विभिन्न पौराणिक कथाये

दिवाली भारत का सबसे लोक प्रिये और महत्वपूर्ण त्यौहार हे। दिवाली आते ही आप और हम सब नए कपड़े सिलाने एवं खरीदने लग जाते हे। बचो को पटाखे खरीदवाने, दोस्तों और रिलेटिव के लिए गिफ्ट खरीदने से लेकर तरह तरह की मिठाईया खरीदना पहले ही सुरु हो जाता हे।

भारत में दिवाली ही केवल ऐसा त्यौहार हे जो सब धरम और पंथ के लोग बिना भेद भाव मानते हे।

दिवाली कब मनाई जाती हे

दिवाली का पर्व ग्रीष्म ऋतू में धान की कटाई के बाद कार्तिका मॉस में अमावस्या को बनाया जाते हे। कार्तिका अमावस्या हिन्दू पंचांग का सबसे कम रौशनी वाला अमावस्या होता हे

दिवाली का पर्व दशहरा के बीस दिन बाद मनाया जाता हे

दिवाली का महत्व

दिवाली का महत्त्व रामायण काल से ज़ुरा हे। भगवन राम अयोध्या के युवराज थे। माता कैकयी द्वारा अपने पिता दसरथ को दिए वचन को निभाने राम 14 साल के वनवास को चले गए.

Ram Lakhsmana Sita vanvas jaate hue, Ram goes into 14 year of exile

14 साल के वनवास के बाद जब वे अयोध्या को लोटे। तब अयोद्या वासियो ने अपने राजा राम चंद्र के स्वागत में पुरे अयोध्या को दीपो से उज्वलित कर दिया। इसी दिन से यह दिन दिवाली के नाम से प्रख्यात हो गया।

दोस्तों दिवाली को festival of lights भी कहा जाता हे। यह भगवन राम के सम्मान में बनाया जाता हे।

इस दिन आप और हम अपने घरो को दीपो और रंगोलियों से उज्वलित और चमका देते हे। आकाश में फूटती चमचमाती आतिशबाजियां पुरे संसार को जगमगा उठती हे।

यह त्यौहार अच्छाई की बुराई पे जीत की तौर पे भी मनाई जाती हे। राजा राम ने असुर रावण जो की बुराई का प्रतीक हे उसपर विजय पाकर धर्म एवं अच्छाई की सदा जीत होती हे इसका प्रमाण दिया हे।

दिवाली के पांच दिन | 5 Days of Diwali

वैसे तो दिवाली साल में एक दिन ही परती हे, लेकिन यह लगातार पांच दिन मनाये जाने वाला त्यौहार हे

दिवाली धन तेरस से सुरु होकर भैया दूज तक अंत होती हे

आईये जानते हे दिवाली के पांच दिन

1) धनतेरस (Dhanteras)

Dhanters gold, silver, jewelery buying
Image Credit | Reuters

धनतेरस दिवाली पर्व के पांच दिनों में पहला दिन होता हे। यह दिन सोना, चांदी और अन्य धातुओ के बर्तन, सिक्के और जेवर खरीदने के लिए शुभ माना जाता हे।

इस दिन नारयण के अवतार भगवान धन्वंतरि का भी प्राकट्य हुवा था। धन्वंतरि भगवान आयुर्वेदा के पूर्ण ज्ञाता एवं रचयता हे

2) छोटी दीपावली

दीपावली का दसूरा दिन वैसे तो छोटी दीपावली के रूप में मनाया जाता हे जहा आप और में वो हर चीज़ करते हे जो दिवाली के दिन करते हे.

choti diwali, choti dipavali 2020

यह दिन नरक चतुर्दश और काली चौदस भी कहलाता हे।

इस दिन की मान्यता यह भी हे की यदि आप सूर्योदय के समाये टिल के तेल से मालिस आदि करके स्नान करे तो समस्त पापो का नाश होता हे। तिल का तेल शरीर के लिए बहुत लाभ कारी होता हे। यह मांसपेसियों की ताकत बढ़ाता हे तधा सौंदर्य में भी बल प्रदान करता हे।

3) दीपावली

Diwali Celebration with Family, burning crackers and fuljari
Image Credit | DeccanChronicle
Laxmi Pujan on Diwali

तीसरा दिन हे दीपावली का। यही दिन मुख्या हे पाँचो दिनों से।

इसी दिन माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था समुन्द्र मंदतन से। यह दिन विशेष हे लख्मी पूजन के लिए। सामान्य जन अपने घरो को दीप और रौशनी से प्रज्युलित करते हे ताकि माँ लक्ष्मी का वास उनके घर में हो सके और धन में वृद्धि तथा ऐश्वर्ये का लाभ हो।

मुख्यतः आज के दिन भगवान श्री राम चंद्र 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लोटे थे। भगवन राम के स्वागत में अयोध्या वासीयो ने अयोध्या को चमका उठा था दीपो से।

4) गोवर्धन पूजा

Govardhan Puja, Shri Krishna lifted govardhan parvat to save gokulwasi from indra

चौथा दिन हे गोवर्धन पूजा का।

गोवर्धन पर्वत एक छोटा सा पर्वत हे बृज में। ऐसी मान्यता हे महाभारत काल की जब गोवर्धन नगरी में इंद्रा ने अपनी शक्ति से पुरे गावो को बारिश में डुबो दिया था तब बालक कृष्णा ने अपनी ऊँगली पे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था गोकुल वासियो को सहरन देने के लिए।

गोवर्धन पर्वत को श्री कृष्णा के सामान जान कर इसकी पूजन व अर्चन होता हे। बृज भूमि तथा वैष्णव जन में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व हे।

5) भैया दूज

bhaiya dooj, festival of bhai bhen
Image Credit | News Nation English

पांचवा तथा दिवाली महोत्सव का आखरी दिन हे भैया दूज। यह भाई बेहेन के पवित्र व अटूट बंधन को प्रेरित करने के लिए विशेष दिन हे । वैसे तो रक्षाबंधन के दिन बेहेन अपने भाई के पास जाकर उसे राखी बांधती हे। मगर भैया दूज में बेहेन अपने भाई को पास बुलाकर तिलक वा भोजन कराती हे।

रक्षा बंधन हो या भैया दूज दोनों में बेहेन की खूब कमाई होती हे भाई से भेट पाकर।

दिवाली का महत्त्व (निष्कर्ष)

दोस्तों इसी के साथ में यहां दिवाली के महत्त्व को समाप्त करता हु।

आशा करता हु की आपको हमारे इस लेख से कुछ ज्यान मिला होगा।

दिवाली के त्योहार पर हम आपसे अनुरोध करते हे की आप वायु प्रदुषण और ध्वनि प्रदुषण न करे।

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