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Ganesh Gayatri Mantra

नमस्कार गायत्री मंत्र तो वैसे आपने सुना ही होगा परंतु क्या आप जानते हैं कि श्री गणेश जीके लिए भी एक गायत्री मंत्र है जिसका नाम है ganesh gayatri mantra. इसका भी अपना ही अलग विशेषता है यह श्री गणेश के भक्तों के लिए विशेष है इस गायत्री मंत्र का गणेश चतुर्थी पर विशेष महत्व है. आज मैं आपको गायत्री मंत्र के बारे में तथा इसके लाभ, इसका महत्व और इसका hindi में मतलब बताऊंगा

Ganesh Idol, Ganesh gayatri Mantra

ॐ एकदंताय विद्महे,

वक्रतुण्डाय धीमहि,

तन्नो दंती प्रचोदयात् ।।


शब्दों का अर्थ

एकदंताय – 1 दांत वाले

विद्महे – जो सर्वव्यापी है

वक्रतुण्डाय – घुमावदार सूंड

धीमहि – हम ध्यान करते हैं और अधिक से अधिक बुद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं

तन्नो दंती – हम 1 दांत वाले भगवान श्री गणेश के समुख भक्ति में झुकते हैं

प्रबोधायत – ज्ञान के साथ हमारे मन को रोशन करें

Meaning of Ganesh Gayatri Mantra

एकदंत का अर्थ हैं 1 दांत वाले, वक्रतुंड का ध्यान करते हैं
दंती हमको उस ईश्वर की ज्ञान और ध्यान में प्रेरित करें एकदंत वक्रतुंड दंती यह तीनों संबोधन भगवान श्री गणेश के लिए ही है

गणेश गायत्री मंत्र का उल्लेख गणपति अथर्व शीर्ष के अंतर्गत आठवें अनुच्छेद में आता है या यूं कहें कि गणपति अथर्व शीर्ष का आठवां अनुच्छेद ही यह है तो भी उचित है

इसे गायत्री मंत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह गायत्री छंद पर आधारित है

गायत्री छंद 24 अक्षरों का होता है कोई भी गायत्री मंत्र हो चाहे वह भगवान श्री गणेश का हो भगवान श्री विष्णु का हो या भगवान शिव का
ओम को छोड़कर प्रत्येक गायत्री मंत्र के वर्णों की संख्या 24 ही होती है

गणेश गायत्री मंत्र के अद्भुत लाभ (Benefits)

इसके निरंतर जाप से ज्ञान की वृद्धि होती है, मन सहज होने लगता है तथा ईश्वरीय ज्ञान और ध्यान की तरफ अभिमुख होने लगता है.

जिन लोगों की भगवान श्री गणेश पर आस्था है उन्हें अपने सामर्थ्य और समय अनुसार भगवान श्री गणेश का ध्यान करते हुए इसका नित्य जाप करना चाहिए संभव हो तो नित्य गणेश पूजन के बाद 108 बार इसका जाप करें ऐसा करने से इस मंत्र का विशेष लाभ प्राप्त होगा

किसी भी गणेश विग्रह का दर्शन करते समय इस मंत्र का जप करते हुए उस मूर्ति की कम से कम तीन परिक्रमा अवश्य करें इससे भगवान श्री गणेश की हम पर विशेष कृपा होती है भगवान श्रीगणेश को अपना इष्ट देव मानने वाले गणेश भक्तों को इस मंत्र का त्रिकाल संध्या अर्थात सूर्योदय दोपहर और सूर्यास्त के समय गणेश गायत्री मंत्र को 3 बार पाठ करने का नियम बना लेना चाहिए इसके अद्भुत लाभ है

लोगों का अनुभव

जब मेने इस मंत्र और इसके अर्थ को पढ़ा, तो में स्वाभिक रूप से इस मंत्र का जप करने लगा। मेरे मन ने मुझे इस मंत्र के हर एक शब्द को समझने के लिए प्रेरित किया और रास्ता दिखाया।

मेने गणेश गायत्री मंत्र का बार बार जप किया गणेश जिकी मूर्ति को अगरबत्ती दिखते हुए। में जब भी श्री गणेश गायत्री मंत्र का जप तथा ध्यान करता हु, मुझे कई आनंदमय और रोमांचिक अनुभव होते हे

मेने हमेसा गनेशी जिको विघ्न हारता के रूप में ही जाना हे। पर जब मेने ये लेख पढ़ा तब मुझे मालूम हुआ की श्री गणेश शंघारकर्ता भी हे संसार की माया के । अब में संसार के दोनों अंग निर्माण तथा संघार को एक दृष्टि से देखता हु. दोनों ही संसार के लिए आवश्यक हे

जब भी में अपनी आध्यात्मिक राह पर किसी बढ़ा को पता हु। तब में श्री गणेश का ध्यान करता हु और संसार की द्वैत धारी गन से अपने आपलो परे पता हु.

मुझे लगता हे श्री गणेश मुझे रास्ता दिखा रहे हे

Sri Ganesh ke 12 नाम

एकदंत, कपिल, गजकर्ण, लबोदर, विकट, सुमुख, विघ्नविनाशक, विनायक, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र, धूमकेतू, गजानन

ओम गण गणपतए नमः ||

आशा करता हूं यह पोस्ट आपके लिए लाभदायक व शुभकारी हो. गणेश चतुर्थी पर गणेश गायत्री मंत्र को अपने मित्रों वह परिवार जनों के साथ जरूर शेयर करें

धन्यवाद

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