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Guru Purnima nibandh hindi

नमस्ते दोस्तों और हैप्पी गुरु पूर्णिमा।आज हम आपके के लिए लाये हे guru purnima pe nibandh in hindi. इस निबंध में हमने गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती हे, गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती हे, गुरु पूर्णिमा का महत्व, गुरु का हमारे जीवन में महत्व और गुरु पर कुछ अनमोल वचन इन सब विशयो के बारे में लिखा हे।

आशा करते हे की आपको हमारा यह गुरु पूर्णिमा निबंध इन हिंदी पसंद आए।

गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है

हिंदू पंचांग की माने तो शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है.

यह पर्व आषाढ़ महीने की पूनम, जब गर्मी कम होने लगती है और वर्षा ऋतु प्रारंभ होने वाली होती है, मनाई जाती है. यह हर साल जून या जुलाई के महीने में पड़ता है

इस बार 2020 मैं गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई को मनाया जाएगा

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है

Guru Purnima ved vyaj ji ke janam tithi ke roop me manai jaati he
Image Credit | hindumythology.org

गुरु पूर्णिमा के मनाए जाने के कई कारण है परंतु प्रमुख कारण वेदव्यास है

आज के ही दिन आषाढ़ महीने की पूर्णिमा पर वेदव्यास जी जन्मे थे

वेदव्यास वेदों के विभाजन करता है. इन्होंने ही वेदो तथा अनेक ग्रंथों को 4 विभागों में विभाजित किया था. यह चार ग्रंथ ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद है. वेदव्यास महाराज महाभारत महाकाव्य के भी लेखक है.

वेदव्यास जी का जन्म 3000 ईसा पूर्व आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को हुआ था.

गुरु पूर्णिमा बौद्ध धर्म के लिए भी महत्वपूर्ण दिन है. आज के दिन ही गौतम बुद्ध ने पहली बार धर्म उपदेश दिया था.

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यह धर्म उपदेश पाने वाले पहले पांच बौद्ध भिक्षु हुए. गौतम बुद्ध एक राजकुमार थे. राज छोड़कर उन्होंने ध्यान व योग से ज्ञान की प्राप्ति करी. गौतम बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है और गुरु पूर्णिमा पर गौतम बुद्ध ने पहली बार ज्ञान उपदेश लोगों को दिया

गुरु पूर्णिमा की बात करें तो आज संत कबीर के शिष्य संत घासीदास का भी जन्म हुआ था

गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा के महत्व को समझने से पहले हम गुरु शब्द का विश्लेषण करते हैं.

गुरु शब्द गु और रु शब्दों से मिलकर बना है. गु का अर्थ है अंधकार तथा रु का अर्थ है मिटाने वाला. गुरु वह है जो जीवन से अंधकार मिटाता है तथा प्रकाश में ले जाता है इस प्रकार गुरु शब्द का विशेषण अंधकार मिटाने वाला और प्रकाशित करने वाला है

अंधकार मिटाने से तात्पर्य है अज्ञान का नाश. प्रकाशित से तात्पर्य है ज्ञान का बोध

वैसे तो हमारे माता-पिता हमें जन्म देते हैं परंतु गुरु हमें जीवन देता है जीवन जीने की शिक्षा के साथ

गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु महेश्वर
गुरु साक्षात परंब्रह्म

अर्थात गुरु हमारे ज्ञान का सृजन करता है तथा हमें ज्ञान का दान देता है
गुरु हमारा पालन करता है, व हमें जीवन जीने की कला सिखाता है. जिससे हम अच्छे व्यक्ति बने तथा जीवन मैं आगे बढ़ सके

Guru ka hamare jivan me mahatva

Guru ka hamare jivan me mahatva
Image Credit | Prabhasakshi

गुरु हमारे अज्ञान का नाश करता है और हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाता है

गुरु को भगवान के समान दर्जा दिया गया है. गुरु भगवान के सामान कल्याणकारी तथा परोपकारी होता है

गुरु या शिक्षक की बात करें तो एक शिक्षक देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है यह देश के भविष्य अर्थात नई पीढ़ी को शिक्षा देखकर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करता है. देश की नई पीढ़ी ही उसका भविष्य है. देश के भविष्य को अच्छा बनाने के लिए अच्छा गुरु या शिक्षक होना अत्यंत आवश्यक है

प्राचीन काल की बात करें तो बालक अपना घर त्याग कर गुरुकुल में रहता था तथा गुरु के सानिध्य में शिक्षा व ज्ञान प्राप्त करता था. गुरु और शिष्य में अच्छा संबंध होता था तथा गुरु शिष्य के लिए पूजनीय होता था

आज के संदर्भ में बात करें तो आज स्कूल कॉलेज बन गए हैं. गुरु शिष्य के संबंध देखे तो दुख होता है. आज गुरु शिष्य के बीच में वह स्नेह तथा मर्यादित संबंध देखने को नहीं मिलता है. गुरु से ज्ञान अर्जित करना आज एक व्यवसाय बन चुका है.

माता पिता को अपने पुत्र व पुत्री को अच्छी शिक्षा प्राप्त कराने के लिए काफी धन अर्जित करना पड़ता है

आज जनसाधारण के मानस में अच्छी शिक्षा प्राप्त करना सिर्फ एक अच्छा पैकेज प्राप्त करना तथा पैसा कमाने का जरिया मात्र रह गया है

ज्ञान कई प्रकार के होते हैं जैसे व्यवसाई ज्ञान, अध्यात्मिक ज्ञान, सामान्य ज्ञान, सांसारिक ज्ञान, कोई कला का ज्ञान. आज आध्यात्मिक ज्ञान की महत्ता काफी कम हो गई है और व्यवसाई, सांसारिक ज्ञान पाने की महत्वकांक्ष चरम पर है

प्रथम गुरु मां

किसी भी मानव की प्रथम गुरु मां होती है. कोई भी शिशु जब जन्म लेता है तो मा ही उसे बोलना, चलना, खड़ा होना, बैठना, खाना इत्यादि सिखाती है

बालक का जन्म के उपरांत प्रथम शब्द मां ही होता है. बालक बड़ा होकर कैसे बनेगा यह उसके बचपन में सीखें आदतों तथा ज्ञान पर निर्भर होता है. बालक अपनी पहली आदतें अपनी मां से ही सीखता है. इस प्रकार मा ही बालक के जीवन का निर्माण करती है

इस तरह से कहा जा सकता है की मां बालक की महत्वपूर्ण तथा प्रथम गुरु है जो बालक के जीवन का निर्माण करती है

गुरु पूर्णिमा पर अनमोल वचन

अंत में गुरु की महिमा का बखान करते हुए कुछ अनमोल वचन

अक्षर ज्ञान ही नहीं
गुरु ने सिखाया जीवन ज्ञान
गुरु मंत्र को कर आत्मसात
हो जाओ भवसागर से पार

हे गुरु आपके ऊपर का कैसे मैं चुकाउ मोल
लाख कीमती धन भला, गुरु है मेरा अनमोल

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, का के लागू पाय
बलिहारी गुरु आपने, जिन गोविंद दियो बताए

मां बाप की मूरत है गुरु
भगवान की सूरत है गुरु
गुरु पूर्णिमा के दिन करते हैं आभार हम
आओ इस गुरु पूर्णिमा पर करें अपने गुरु को प्रणाम

कर्ता करे न कर सके, गुरु करे सब होय
सात द्वीप नौ खंड में, गुरु से बड़ा न कोय
मैं तो सात समुद्र की मसीह करूं, लेकिन सब बादराय
सब धरती कागज करूं पर गुरु गुण लिखा न जाए

यहाँ पर हमारा गुरु पूर्णिमा पर निबंध समाप्त होता हे। आशा करते हे की आपको हमारा लिखा निबंध पसंद आया हो

धन्यवाद ||

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