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holi ki katha

 क्या आप जानना चाहते हैं holi ki katha और होली का क्या महत्व है.  तो आइए आज हम बात करते हैं होली की कथा पर. 

नमस्ते दोस्तों हैप्पी होली. मित्रों कैसे हैं आप सब कुशल मंगल तो है. आज हम जानेंगे होली की पौराणिक कथा तथा महत्व.

दोस्तों होली की कथा हिरण्यकशिपु के भाई हिरण्याक्ष से शुरू होती है.  कथा ऐसी है कि हिरण्याक्ष ने धरती पर त्राहि-त्राहि मचा दी थी हर तरफ उथल-पुथल मचा दिया था संत जन व साधारण मानव को बहुत परेशान करता था तथा पीड़ा पहुँचाता था.

तब भगवान विष्णु ने वाराहा अवतार लेकर आता ताई हिरण्याक्ष को मार डाला.

हिरण्याक्ष  की मृत्यु से उसका भाई हिरण्यकशिपु बहुत आहित हुआ.  और उसने ठान ली कि वह धरती पर किसी को भगवान का नाम नहीं लेने देगा.

हिरण्यकशिपु की तपस्या

Image Credit | Hindu Blog

 हिरण्यकशिपु ने शक्तिशाली बनने ओर बल अर्जित करने के लिए भगवान ब्रह्मा की तपस्या शुरू कर दी उसने कठोर तप किया अनेकों अनेकों साल तक बिना पानी व अन्य के.

 तब भगवान ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर हिरण्यकशिपु को वरदान दिया .

हिरण्यकशिपु ने भगवान ब्रह्मा से वरदान में मांगा था कि उसकी मृत्यु ना किसी प्राणी से हो न किसी मनुष्य से हो ना किसी पशु से ना किसी तरह से ना वह घर के अंदर मरे ना घर के बाहर. ना दिन में मरना रात में मरे 

ना वो किसी शास्त्र से मारे ना वो पृथ्वी पर मरे ना आकाश में.  अंततः वह अमर होना चाहता था  परंतु दोस्तों हम मृत्यु  लॉक के प्राणि यों को यह वरदान नहीं मिल सकता इस मृत्यु लोक का नियम है कि जो आता है वह तो जाएगा ही, कोई भी अमर नहीं है, कोई भी अजर नहीं है

दोस्तों हिरण्यकशिपु ने भगवान ब्रह्मा के दिए गए वरदान से ताकत पाकर चारों दिशाओं व आकाश पाताल में त्राहि-त्राहि मचा दी.  

मगर भगवान का कर्म विधान देखिए हिरण्यकशिपु के दरबार में कोई भी ऐसा नहीं था जो भगवान का नाम लेता था.

परंतु वहां एक नन्हा बालक था जो एकमात्र ही ऐसा  जीव था जो वहां भगवान विष्णु का नाम लेता था

 यह बालक प्रहलाद था.  अचंभा करने वाली बात तो यह कि प्रहलाद  हिरण्यकशिपु का बालक था. प्रहलाद भगवान के नाम का निरंतर कीर्तन करता रहता था. 

ओम नमो भगवते वासुदेवाय ||

 जब हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद के नाम कीर्तन तथा भगवान के नाम के  जाप का पता चला तब उसने कई प्रकार से प्रहलाद के भगवान नाम स्मरण को रोकने के लिए अनेक उपाय करें. तथा मारने की भी कोशिश करी गई 

1) हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद की जीव कटवाने का प्रयास किया

Image Credit | Mythnosis

हिरण्यकशिपु को पप्रहलाद के भगवान नाम स्मरण पसंद नहीं आया इसलिए उसने प्रहलाद के जीव काटने का आदेश दिया.  

सैनिकों ने प्रहलाद को ले जाकर उसकी जीवा काटने का प्रयास किया परंतु वह यह कार्य सिद्ध नहीं कर पाया. 

प्रहलाद भगवान का नाम स्मरण करता रहा और सैनिक अपना प्रयास करते रहे प्रहलाद भगवान का परम भक्त था भगवान अपने भक्त को कष्ट देने कैसे दे सकते हैं.

भगवान की माया के प्रभाव से सैनिक प्रहलाद  का कुछ भी ना कर पाए और प्रहलाद भगवान का नाम जप करता चला गया

 2) प्रहलाद को पहाड़ की चोटी से फेका गया

prhalad was thrown from cliff
Image Credit | Journey Era

 दंभी दानव प्रहलाद को लेकर पहाड़ की चोटी पर आ गए और वहां से फेंक दिया 

प्रहलाद यहां पर भी भगवान का नाम निरंतर ही जप करता रहा.

प्रहलाद परम भागवत था.  वह भगवान के नाम मै इतना लीन हो जाता था कि  उसे बाहरी सांसारिक कष्ट का पता ही नहीं चलता था.

वह परम योगी के समान था वह भी बालक की आयु में

पहाड़ी की चोटी से नीचे गिरते समय प्रहलाद भगवान के नाम में स्थितप्रज्ञ था.

नदी से भगवान विष्णु ने प्रकट होकर प्रहलाद को अपनी गोद में पकड़ लिया और प्रहलाद फिर बच गया और हिरण्यकशिपु फिर हार गया 

3) प्रहलाद को आग में जलाया गया

Image Credit | Yoga For Modern Age

हिरण्यकशिपु की बहन होलीका  ने प्रह्लाद को आग में जलाने की कोशिश करी.

होली प्रहलाद को अपनी गोदी में बिठाकर जलती आग में बैठ गई.

दोस्तों होलिका को वरदान प्राप्त था कि आग उसे आहत नहीं कर सकता

मगर भगवान की लीला और माया सारी सिद्धि, रिद्धि, ताकत सब से परे हैं

भगवान ने अपने परम भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए होलिका के सिद्धि वरदान को निष्फल और बेअसर कर दिया तथा प्रहलाद  को वह  सिद्धि प्राप्त कर दी कुछ क्षण के लिए

 अंततः होलिका आग में जलकर मर गई और प्रहलाद बच गया इस प्रकार हिरण्यकशिपु फिर हार गया

होली का पर्व हिरण्यकशिपु की बहन होलिका के नाम पर ही है

होलिका आग में जलकर भस्म हो गई थी.  और प्रहलाद बच गया था

इसी दिन को होली के नाम से मनाया जाने लगा और इस दिन होलिका के पुतले अथवा लकड़ी जलाई जाती है रात में. 

कहां है प्रहलाद का भगवान

हिरण्यकशिपु प्रहलाद से पूछता है कि तेरा भगवान कहां है वह दिखता क्यों नहीं है. प्रहलाद कहता है कि भगवान चारों दिशाओं में विद्यमान है वह इस महल के कोने-कोने में है तथा हर खंबे में विद्यमान है

 हिरण्यकशिपु प्रहलाद को चुनौती देता है.  वह महल के खंभे को अपने शक्ति से तोड़ देता है

भगवान अपने परम भक्त प्रहलाद  की बात को सत्य कर देते हैं और वह महल के खंभे से प्रकट हो जाते हैं

narisngh manifest from pole, bhagwan narsingh khambe se hue prakat
Image Credit | Jagran.com

 यह भगवान का अवतार नरसिंभा अवतार कहलाता है. यह अवतार बड़ा ही भयानक देखने में वह सुनने में जान पड़ता है. आधा शरीर मानव का आधा शरीर सिंह.  नरसिंह भगवान की दहाड़ से सारे सैनिक भाग जाते

नरसिंह भगवान हिरण्यकशिपु को पकड़कर महल के चौराहे पर द्वार पर ले जाते हैं. नरसिंह भगवान अपने नुकीले व तेज नाखूनों से हिरण्यकशिपु का पेट चीर देते हैं और उसकी हत्या कर देते हैं 

इस प्रकार से हिरण्यकशिपु को दिए गए वरदान का हनन नहीं होता क्योंकि मारने वाला ना तो इंसान था ना ही  पशु 

 ना वह दिन में मारा गया नव  वह रात  में, ना घर के अंदर मारा गया, ना घर के बाहर  परंतु घर के चौराहे पर मारा गया

 इसी के साथ हम यहां पर holi ki katha तथा भक्त प्रहलाद की भक्ति, शक्ति का परिचय  का अंत  करते हैं

 अगर आपको हमारा यह लिखा आर्टिकल होली की कथा तथा महत्व पर पसंद आया हो  तो अपने दोस्तों व परिवार जन के साथ शेयर जरूर करें और नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें बताएं 

धन्यवाद ||

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