Home Ganesh Chaturthi Why Ganesh Chaturthi is Celebrated

Why Ganesh Chaturthi is Celebrated

क्या आप जानना चाहते हे की why ganesh chaturthi is celebrated, ganesh chaturthi कैसे धूम धाम से मनाई जाती हे, ganesh chaturthi की history क्या हे , गणेश जी से जुड़ी पौराणिक कथा क्या हे और why ganesh chaturthi is celebrated for 10 days.

तो आज में आपके सारे प्रश्नो का उत्तर देने का प्रयास करूँगा वो भी hindi में।

 भारत में मनाए जाने वाले कई त्योहार हैं जिनमें सबसे ज्यादा मनाए जाने वाला होली, दिवाली, नवरात्रि और ईद है

 इन त्योहारों से हटकर एक त्यौहार गणेश चतुर्थी भी है .  यह इतना लोकप्रिय त्यौहार नहीं है इसकी महत्ता महाराष्ट्र राज्य में ज्यादा है. 

Why Ganesh Chaturthi is celebrated

why ganesh chaturthi is made in mumbai

Ganesh chatruthi श्री गणेश जी की जन्म तिथि  वह जयंती के रूप में मनाया जाता है.  श्री गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है इनकी अलग ही  महत्ता है सभी देवी, देवताओं की पूजा करने से पहले श्री गणेश जी का नाम लिया जाता है

गणेश चतुर्थी अगस्त और सितंबर माह में पड़ने वाला 10 दिन लंबा त्यौहार है. यह विशेष रूप से महाराष्ट्र में अलग ही चमक धमक के साथ मनाया जाता है बड़े-बड़े पंडाल, बड़ी-बड़ी गणेश जी की मूर्तियां के साथ. 

 लोग महाराष्ट्र में गणेश जयंती बड़ी धूमधाम से मनाते हैं.  गणेश जी की 6000 मूर्तियां महाराष्ट्र में हर साल कमीशन करी जाती है

 गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र के बाद आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, पुणे, कर्नाटका और मुंबई में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है.

मुंबई में आपको प्रत्येक घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करी हुई जरूर मिलेगी. इस पर्व पर घर की अच्छी साफ सफाई की जाती है. मूर्ति को स्थापित करने से पहले मंत्र और श्लोको का विधि विधान पूर्वक उच्चारण करके लोग गणेश जी की स्थापना अपने घरों में करते हैं

10 दिन लंबा बनाए जाने वाला यह पर्व गणेश जी की मूर्ति विसर्जन के साथ अंत होता है

Idol immersion in Ganesh Chaturthi

10 दिन लंबे इस त्यौहार के बाद गणेश जी की मूर्ति को विसर्जन के लिए तैयार किया जाता है. विसर्जन के समय महाराष्ट्र में अलग ही चमक और शोर होता है. सारे beach, समुद्र तल लोगों से भर उठती है.  हर चौपाटी पर सब गणेश जी की मूर्ति को विसर्जन करते हुए दिखाई पड़ते हैं.

 दोस्तों गणेश जी की मूर्ति को पहले स्थापित करना 10 दिन तक वंदना, पूजा, अर्चना करना फिर मूर्ति का विसर्जन करना हमें एक बहुत बड़ी सीख देता है यह हमें इस संसार के नश्वर होने की शिक्षा देता है. 

इस संसार में अजर अमर कुछ भी नहीं सब कुछ नश्वर है. गणेश जी की मूर्ति की तरह हमारा शरीर भी मां बाप द्वारा स्थापित किया गया है चंद दिनों की यह जिंदगी जीने को मिली है. इसके अंत में यह पार्थिव शरीर भी एक दिन नष्ट हो जाएगा तथा पानी में बहा दिया जाएगा

गणेश विसर्जन की बात करें तो यह कई गायक, नाचने वाले, पंडित और अन्य कलाकार के साथ निकलता हुआ देखा जा सकता हे.  कलाकार अपनी कला का विशेष प्रदर्शन करते हैं इस जुलूस में.

फल, फूल, नारियल आदि पंडित लोग लेकर श्री गणेश को अर्पण करते हैं. अन्य लोग गणपति बप्पा मोरया का गुणगान बार-बार करते हुए इस जुलूस में भाग्य लेते हैं

 महाराष्ट्र में सभी समुद्र तटों से ज्यादा भीड़ आपको chowpati beach पर देखने को मिल सकती है इस पर्व पर. 

History of Ganesh Chaturthi

 आदिकाल की बात करें तो गणेश चतुर्थी अन्य त्योहारों की तरह प्रतिबंधित त्यौहार था जब देश मुगलों की जागीर था  

 मराठाओं के काल में,  छत्रपति शिवाजी  महाराज ने गणेश चतुर्थी पर्व को नवजीवन देकर पुनः स्थापित किया था. 

शिवाजी महाराज ने यह त्योहार देशभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए पुनः स्थापित किया था

सन 1882 में british काल में इस त्यौहार को फिर से पूरा स्थापित करना और प्रसार प्रचार करना स्वतंत्रता सेनानी श्री बाल गंगाधर तिलक ने किया था.

 ब्रिटिश राज में यह त्यौहार अक्सर ब्रिटिश ताकतों के खिलाफ भाषण देने व लोगों को जागृत करने और उठाने का एक जरिया था

Pauranik Katha of Sri Ganesha’s Birth

शिव महापुराण में उल्लेख आता है कि एक समय जब adya shakti माता पार्वती अपने शरीर पर हल्दी माला,  तब स्नान के पश्चात जब यह हल्दी का उबटन उत्तरा तो मां ने  इस लेप से एक पुतला बनाया.  और इस पुतले में prana संचार कर दिया.

इस हल्दी के पुतले से उत्पन्न होने वाला बालक विनायक के नाम से जान आ गया.

माता ने पुत्र विनायक को  द्वार पर बैठने को कहा तथा किसी अन्य को अंदर आने से रोकने के लिए आज्ञा दी

Image Credit | Pinterest

कुछ समय बाद जब yogishvara शिव शंकर घर आए तो उन्होंने मां पार्वती से मिलने की जिज्ञासा उत्पन्न करी और वह घर के अंदर प्रवेश करने के लिए अग्रसर हुए

जहां विनायक ने उनका मार्ग रोका.  शंकर जी ने गणेश के मार्ग रोकने से क्रोध उत्पन्न किया.  श्री गणेश नहीं माने तब शिवजी ने क्रोधित होकर अपने trishul से गणेश का सर काट दिया.

जब मां पार्वती बाहर आई तब शंकर जी को श्री गणेश के बारे में बताया .

शिव जी ने श्री गणेश के बारे में जानकर उन्हें पुनः प्राण संचार करने का फैसला किया.

उन्होंने अपने गणों को किसी बालक का सर काट कर लाने को बोला. 

गणों ने  बालक के सिर के रूप में एक हाथी का सिर ले आए.

शिव जी ने यही सीर विनायक के धर्म में जोड़ कर उसमें प्राण संचार कर दिया और विनायक पुनः जीवित हो उठा इसी तरह श्री गणेश को हाथी का सिर मिला. 

Why Ganesh Chaturthi is celebrated for 10 days in hindi

पौराणिक मान्यताओं को माने तो एक समय की बात है जब वेदव्यास जी ने श्री गणेश जी को महाभारत की कथा सुनाई.  महाभारत की यह कथा 10 दिन लंबी चली.

 श्री गणेश ने महाभारत की यह कथा सुनते समय नेत्र बंद कर लिए और मौन होकर बैठ गए.

गणेश जी ने पूरी ekagrata से महाभारत की कथा 10 दिन तक सनी.  कथा समाप्त होने के पश्चात जब श्री गणेश ने आखे खोला तो उनका शरीर का तापमान बहुत ज्यादा अधिक हो गया था.

शरीर का तापमान कम करने के लिए गणेश निकट स्थित कुंड में स्नान करने गए.

इसी प्रकार गणेश चतुर्थी में भी 10 दिन तक गणेश जी की मूर्ति को लगाया जाता है.  10 दिन के पश्चात उनकी मूर्ति को विसर्जन कर दिया जाता है 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Krishna Janmashtami

नमस्ते दोस्तों कैसे हे आप । krishna janmashtami की हार्दिक सुभकामनाये। आज में आपको बताऊंगा कृष्णा जन्मष्टमी से जुड़ी रोचक तथ्य।

Navratri साल में do baar kyu manayi jaati he

नमस्ते दोस्तों. कैसे हे आप सभी. नवरात्री बड़ा धूमधाम और श्रद्धा से मनाये जाने वाला त्यौहार हे. नवरात्री आते ही हम सभी...

9 Days of Navratri (Navdurga)

नमस्कार मित्रो। नवरात्री 9 दिन मनाए जाने वाला प्राचीन त्यौहार हे। नवरात्री की राते(9 days of Navratri) साधना और पूजा के लिए...

7th Day of Navratri (Kalratri)

नमस्कार मां के भक्त जनों. नवरात्रि की छठी रात्रि (7th Day of Navratri) पर हम देवी कालरात्रि की पूजा करते हैं. पिछली बीती...